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शुभ चौघड़िया

वैदिक ज्योतिष के आधार पर अपनी गतिविधियों के लिए सबसे शुभ समय अवधि खोजें

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हिन्दू माहमाघ (कृष्ण)
तिथिअमावस्या
विक्रम संवत2082

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Tuesday, 17 February 2026

चौघड़िया के बारे में

चौघड़िया एक प्राचीन हिंदू वैदिक ज्योतिष समय प्रणाली है जिसका उपयोग दिन के शुभ और अशुभ समय को खोजने के लिए किया जाता है। इसका उपयोग यात्रा, व्यवसाय, या किसी भी महत्वपूर्ण कार्य को शुरू करने के लिए किया जाता है।

७ प्रकार के चौघड़िया और उनके अर्थ

अमृत (सर्वोत्तम)

चंद्रमा
शुभ (अमृत)

सभी प्रकार के शुभ कार्यों के लिए उत्तम।

शुभ (उत्तम)

बृहस्पति
शुभ

विवाह, धार्मिक समारोह और उत्सवों के लिए विशेष रूप से शुभ।

लाभ (उन्नति)

बुध
शुभ

शिक्षा, नए कौशल सीखने और व्यापार शुरू करने के लिए उत्तम।

चर (सामान्य)

शुक्र
मध्यम/शुभ

यात्रा और गति से संबंधित कार्यों के लिए उत्तम।

उद्वेग (अशुभ)

सूर्य
अशुभ (व्याकुलता)

आम तौर पर अशुभ, लेकिन सरकारी कार्यों के लिए अच्छा माना जा सकता है।

काल (हानि)

शनि
अशुभ

धन संचय को छोड़कर अन्य शुभ कार्यों के लिए वर्जित।

रोग (अमंगल)

मंगल
अशुभ

वाद-विवाद, युद्ध और शत्रुओं को हराने के अलावा अन्य कार्यों के लिए वर्जित।

🧮 गणना विधि

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को 'दिन का चौघड़िया' और सूर्यास्त से अगले सूर्योदय तक के समय को 'रात्रि का चौघड़िया' कहा जाता है। प्रत्येक अवधि को ८ बराबर भागों में विभाजित किया जाता है।

⚠️ महत्वपूर्ण नियम

  • वार वेला, काल वेला और काल रात्रि के दौरान कोई भी शुभ कार्य नहीं करना चाहिए।
  • यदि अमृत या शुभ चौघड़िया राहु काल के साथ आता है, तो राहु काल को प्रधानता दी जानी चाहिए और उस समय शुभ कार्य से बचना चाहिए।